आज है पृथ्वी दिवस जाने क्यों मनाते है 22अप्रैल को पृथ्वी दिवस इस साल का क्या है पृथ्वी थीम

“धरा नहीं होगा तो सब धरा रह जायेगा “,आज है World Earth Day l हर साल विश्वभर में 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाया जाता है l पहली बार पृथ्वी दिवस 1970 में मनाया गया था l पृथ्वी दिवस पृथ्वी पर रहने वाले जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों को बचाने और दुनिया भर में पर्यावरण के प्रति लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस (World Earth Day 2020) मनाया जाता है l पृथ्वी दिवस यानी अर्थ डे के मौके पर पर्यावरण संरक्षण के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है, साथ ही लोग पर्यावरण को बेहतर बनाने का संकल्प भी लेते हैं l लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘पृथ्वी दिवस’ या ‘अर्थ डे’ मनाए जाने की शुरुआत कैसे हुई? इस शब्द को लाने वाले जुलियन कोनिग थे l आपको बता दे की सन् 1969 में उन्होंने सबसे पहले इस शब्द से लोगों को अवगत करवाया l पृथ्वी दिवस एक वार्षिक आयोजन है, जिसे 22 अप्रैल को दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण और समर्थन प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया जाता है l इसकी स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने 1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप की थी जिस से सबको पता चले l अब इसे 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है उनमे से एक भारत भी है l सीनेटर नेल्सन ने पर्यावरण को एक राष्ट्रीय एजेंडा में जोड़ने के लिए पहले राष्ट्रव्यापी पर्यावरण विरोध की प्रस्तावना भी दी थी l जानेमाने फिल्म और टेलिविज़न अभिनेता एड्डी अलबर्ट ने पृथ्वी दिवस, के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी भी थी l हालांकि, पर्यावरण सक्रियता के संदर्भ में जारी इस वार्षिक घटना के निर्माण के लिए अलबर्ट ने प्राथमिक और महत्वपूर्ण कार्य किए, जिसे उन्होंने अपने सम्पूर्ण कार्यकाल के दौरान प्रबल समर्थन दिया गया l ऐसा माना जाता है कि विशेष रूप से 1970 के बाद पृथ्वी दिवस को अलबर्ट के जन्मदिन, 22 अप्रैल, को मनाया जाने लगा l इस साल अर्थ डे की थीम क्लाइमेट एक्शन है l क्लाइमेट में लगातार हो रहे बदलाव के कारण लाइफ सपोर्ट सिस्टम को खतरा है और डर बना हुआ है l अर्थ डे ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, अब वक्त है कि विश्वभर के सभी नागरिक जलवायु संकट से निपटने के लिए आगे आएं और साथ में काम करें क्योंकि ऐसा न करने के कारण लोगों का वर्तमान और भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए एक खतरनाक भविष्य तैयार हो रहा है जिससे पानी की दिक्क्त बढ़ सकती है l कहते है न “आने वाली पीढ़ी है प्यारी तो , पृथ्वी को बचाना है हमारी ज़िम्मेदारी ” l

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