डोनाल्ड ट्रंप की जगह जो बाइडन के आने से भारत के लिए क्या-क्या बदलेगा

अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन जब व्हाइट हाउस पहुँचेंगे तो इसका भारत और अमेरिका के रिश्ते पर क्या असर पड़ेगा? राजनीतिक हलकों में ये सवाल पूछा जाने लगा है.

इन चर्चाओं के बीच भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते मंगलवार को जो बाइडन से फ़ोन पर बातचीत की.

अपनी बातचीत के बारे में ट्विटर पर जानकारी देते हुए नरेंद्र मोदी ने लिखा, “फ़ोन पर बाइडन को बधाई दी. हमने भारत-अमरीकी रणनीतिक साझेदारी के प्रति प्रतिबद्धता ज़ाहिर की और हमारी साझी प्राथमिकता वाले मुद्दों पर बातचीत की- इसमें कोविड- 19 महामारी, जलवायु परिवर्तन, और इंडो पैसिफ़िक रीजन में आपसी सहयोग की बात शामिल है.”

भारतीय प्रधानमंत्री ने अमेरिका की नव-निर्वाचित उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से भी बात की. नरेंद्र मोदी के मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से रिश्ते काफ़ी मधुर रहे थे और इसको देखते हुए क़यास लगाए जा रहे हैं कि बाइडन के साथ नरेंद्र मोदी के रिश्ते कहीं ज़्यादा औपचारिकता भरे होंगे.

 

वीटो क्या है?
Veto लैटिन भाषा का शब्द है जिसका मतलब होता है ‘मैं अनुमति नहीं देता हूं’। प्राचीन रोम में कुछ निर्वाचित अधिकारियों के पास अतिरिक्त शक्ति होती थी। वे इन शक्ति का इस्तेमाल करके रोम सरकार की किसी कार्रवाई को रोक सकते थे। तब से यह शब्द किसी चीज को करने से रोकने की शक्ति के लिए इस्तेमाल होने लगा। मौजूदा समय में यूएन सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों चीन, फ्रांस,रूस, यूके और अमेरिका के पास वीटो पावर है। स्थायी सदस्यों के फैसले से अगर कोई सदस्य सहमत नहीं है तो वह वीटो पावर का इस्तेमाल करके उस फैसले को रोक सकता है। यही मसूद के मामले में हुआ। सुरक्षा परिषद के चार स्थायी सदस्य उसे ग्लोबल आतंकी घोषित करने के समर्थन में थे लेकिन चीन उसके विरोध में था और उसने अड़ंगा लगा दिया।

 

हालाँकि विश्लेषकों का यह भी मानना है कि दोनों देश कारोबारी स्तर पर बीते दो दशक में इतने क़रीब आ चुके हैं कि वहाँ से पीछे नहीं हटा जा सकता.

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